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वास्तु पुरुष उत्पत्ति


वास्तु पुरुष  कौन है इनकी उत्पत्ति कैसे हुई और यह कैसे कार्य करते हैं

हेलो दोस्तों आज हम बात करेंगे वास्तु पुरुष के बारे में, वास्तु को समझने के लिए वास्तु पुरुष को भी समझना उतना ही जरूरी है जितना अंग्रेजी पढ़ने के लिए A,B,C,D की जानकारी होना, दोस्तों बहुत समय पहले की बात है जब भगवान शिव और राक्षस अंधक का युद्ध हुआ, तभी वास्तु पुरुष का जन्म हुआ सभी  ग्रंथों ने इस बात को स्वीकार किया है। किंतु सभी ग्रंथों में अपने कुछ भिन्न और अलग विचार लिखे हैं जिसमें किसी ने कहा है की अंधक से युद्ध करने के दौरान शिवजी जब थक गए तो उनके अनवरत पसीना बह रहा था उस पसीने की बूंदों से एक व्यक्ति का जन्म हुआ जोकि काफी भूखा था और वह सब कुछ खाना चाहता था तो पृथ्वी आकाश सभी कुछ निगलना चाहता था जिससे देवता और  असुर दोनों भयभीत हो गए और ब्रह्मा जी के पास इसके उपाय के लिए गए, तब ब्रह्माजी ने सभी देवताओं और असुरों से उसे पकड़ने के लिए कहा और उसे उल्टा करके पृथ्वी पर लेट जने को कहा
vastu purush,
vastu purush
तब वास्तु पुरुष ने देवताओं से कहा कि मैं इस तरह से कब तक रहूंगा और क्या खाऊंगा? तब देवताओं ने उसकी बातों को सुनकर के कहा की
 आजभाद्रपद शुक्ल तृतीया दिन शनिवारएवं विशाखा नक्षत्र हैअतः तुम यहां जमीन पर लेट जाओ और हर 3 महीने में अपनी स्थिति परिवर्तित करते रहो  और जो व्यक्ति भवन निर्माण या किसी अन्य निर्माण में आपका( वास्तु पुरुष) का स्मरण और पूजन करें बिना न्यू (faundation) डाले या निर्माण कराएं तो ऐसी स्थिति में तुम उन्हें परेशान करोगे और उन्हें खा भी लोगे इसके लिए उस व्यक्ति विशेष को वास्तु पुरुष को संतुष्ट करना होगा इससे वास्तु पुरुष काफी संतुष्ट हुए और उसी समय से वास्तु पुरुष की पूजा का प्रचलन प्रारंभ हो गया।

 एक अन्य ग्रंथ के अनुसार त्रेतायुग में देवताओं और असुरों का युद्ध चल रहा था, देवताओं की ओर से देवों के देव महादेव भगवान शिव युद्ध कर रहे थे और असुरों की ओर से अंधकासुर युद्ध कर रहे थे
सालों युद्ध करने के दौरान एक दिन "भदरा के बीच गुलिका योग वाले दिन व्यतिपात योग व विष्ट करण" में लड़ते वक़्त उनके शरीर से पसीने की कुछ बूंदे जमीन पर गिरने से विराट वास्तु पुरुष का जन्म हुआ । उनका स्वरूप अत्यंत विराट था वह बहुत बलशाली थे थोड़ी देर में उन्होंने पूरी पृथ्वी को ढक लिया उस विशाल पुरुष को देखकर देवता और असुर दोनों भयभीत हुए युद्ध थम गया देवताओं ने सोचा यह कोई असुर है और  असुरों ने सोचा यह कोई देव पुरुष है, जो अत्यंत विराट है किंतु कुछ समय के बाद ही देवता और असुर यह जानने के लिए ब्रह्मा जी के पास गए  और ब्रह्मा जी से पूछा की, हे ब्रह्मा जी यह विशाल पुरुष कौन है तब ब्रह्माजी ने बताया कि यह वास्तु पुरुष है आप सभी इसे धरतीपुत्र भी कह सकते हैं
earth
earth
ब्रह्मा जी ने उसे अपने पुत्र की संज्ञा दी और कहा की हे वास्तु पुरुष आप भगवान शिव के पसीने की बूंदों के द्वारा पृथ्वी से उत्पन्न हुए हो आपको जगत कल्याण के लिए फिर से पृथ्वी में समाना होगा, मैं आपको वरदान देता हूं
  जो भी व्यक्ति भवन, नगर तालाब, मंदिर, आदि का निर्माण करते समय आप को ध्यान में रखकर काम करेगा उसको देवता समृद्धि शाली व उसके सभी कार्यों में सहायक होंगे, नहीं तो असुर उसको तकलीफ देंगे जिस जिस देवता ने उस विशाल पुरुष को जहां जहां से पकड़ रखा था वहां वहां उस देवताओं का वास होगा और जहां जहां असुरों ने पकड़ा वहां असुर का वास होगा वास्तु पुरुष ब्रह्मा जी से आज्ञा लेकर पृथ्वी में समाने लगे और एक विशेष मुद्रा में बैठ गए उनकी पीठ south east  की तरफ मुंह North east की तरफदोनों हाथों को जोड़कर धरती मां के रूप में आदित्य की शक्ति को नमस्कार किया और एक विशेष मुद्रा में धरती में समा गए ।
 अब यहां एक बात यह समझने की है कि जिस प्रकार से हम सभी के अंदर ऊर्जा  उपस्थित है जिसके कम या ज्यादा होने से हमारे शरीर मन मस्तिष्क सभी प्रभावित हो जाते हैं इसी प्रकार से सभी जीव इस धरती पर विचरण करते हैं जो समस्त ब्रह्मांड का एक अंश हैं जिनके अंदर ब्रह्मांड की ऊर्जा मौजूद है या यूं कहें कि हमारे अंदर भी एक ब्रह्मांड है और सभी व्यक्ति विशेष जीव जंतु Atom सभी एक ब्रह्मांड का सूक्ष्म रूप है।
तो कहने का मतलब यह है कि जब हम किसी  निर्माण का आधार रखते हैं तब वह ब्रह्मांड से अलग होता है और खुद उसमें ब्रह्मांड की ऊर्जा का संचरण होने लगता है और वह अपनी ऊर्जा को स्वयं विकसित
करता है और वह ऊर्जा उस चारदीवारी के अंदर कार्य करने लगती है चार दिवारी उठते ही एक नए वास्तु पुरुष का मुद्रा का भी निर्माण हो जाता है और वह वहां रहने वाले व्यक्ति के ऊपर पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों प्रभाव देने लगता है । इसी प्रकार से वास्तु पुरुष निरंतर अपना  कार्य करते रहते हैं ।



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Astro Vastu Sarvesh (AVS) का उद्देश्य लगो की जनम कुंडली से निकलने वाली ऊर्जा और उस व्यक्ति के मकान से निकलने वाली ऊर्जा के बीच तालमेल बैठाना ही है, ताकि वो व्यक्ति मकान के बजाय "सुख और समृद्ध घर" मे रहे। इंसान के सोच से कर्म का निर्माण होता है, और कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है, AVS आपके कर्म को जागृत करते है और आप अपने भाग्य को।

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