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What is Vastu Shastra And Significance In Hindi

What is Vastu Shastra And Significance In Hindi

वास्तु शास्त्र क्या है इसका सिद्धांत क्या है इसका महत्व क्या है

आज हम इसी विषय में जानेंगे दोस्तों, वास्तु का शाब्दिक अर्थ है भवन वह चाहे रहने के लिए हो, या व्यापार करने के लिए हो, या किसी अन्य चीज के लिए बनाया गया भवन, इसके अंतर्गत आता है। अब बात करते हैं अगर इसके सिद्धांत की तो इसका सिद्धांत पांच तत्वों पर जो कि, जल तत्व, पृथ्वी तत्व, वायु तत्व, अग्नि तत्व और आकाश तत्व इन पांच तत्वों के ऊपर आधारित होता है वास्तुशास्त्र हमारे पुरातन शास्त्रों में से एक है जो कई 100 सालों से या यूं कहें हजारों सालों से हमारे पूर्वजों ने, ऋषि-मुनियों ने, हमें एक  धरोहर के रूप में इसे हमें प्रदान किया है। सर्वप्रथम वास्तु   के सिद्धांत के बारे में ब्रह्मा जी के पुत्र श्री विश्वकर्मा जी ने  अपने ग्रंथ "विश्वकर्मा प्रकाश" में की थी इसके अंतर्गत उन्होंने चार दिशाओं चार उपदिशा और उप उप दिशाओं के बारे में विस्तार से वर्णन किया और किस दिशा में कौन से एनर्जी किस रूप में विद्यमान होती है इसके बारे में भी उन्होंने अपने ग्रंथ में पूर्ण रूप से वर्णन किया। वास्तु शास्त्र हमें सुख, धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष की प्राप्ति का रास्ता दिखाता है वास्तु शास्त्र  का ज्ञान मृत्यु पर विजय प्राप्त कर पृथ्वी पर परम आनंद उत्पन्न करता है अर्थात किसी भी बड़ी बीमारी से लड़ने में वास्तु शास्त्र हमारी मदद करता है
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इसके ज्ञान से हम अपनी बीमारी से दूर हो सकते हैं और उसे पूर्ण रूप से ठीक भी कर सकते हैं हमारे ऋषि-मुनियों ने हमारे आसपास की सृष्टि के साथ मानव शरीर भी पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश तत्वों से बना है और वास्तु शास्त्र के अनुसार यही पंचतत्व जो हमारे शरीर को निर्मित करने में मदद करते हैं वही पंचतत्व हमारे रहने के वातावरण में मौजूद पंच तत्वों से निकलने वाली ऊर्जा से हमारे शरीर को हमारे मन को एकॉकार भी करते हैं और ऊर्जावान भी करते हैं, भूखंड के शुभ अशुभ दशा का अनुमान वास्तविक आसपास की चीजों को देखकर ही लगा लेते हैं भूखंड किस दिशा की ओर खुला है और उसके रास्ते कैसे हैं इससे उस भूखंड पर कैसा प्रभाव पड़ेगा इसकी जानकारी वास्तु विद इन्हीं सिद्धांतों के आधार से करते हैं। हर मनुष्य की इच्छा होती है कि उसका घर सुंदर हो सुखद हो जहां सकारात्मक ऊर्जा का वास हो जहां रहने वाले सुखमय जीवन व्यतीत करें इसके लिए आवश्यक है कि वास्तु सिद्धांतों का पूर्ण रूप से पालन किया जाए यदि उसमें कोई वास्तुदोष उत्पन्न हो जाता है तो किसी अच्छे वास्तुविद को या वास्तुशास्त्री को दिखाकर उसकी ऊर्जा को संतुलित करने का प्रयास करें और वास्तु सिद्धांतों का पालन कर अपने जीवन को सुखमय बनाएं अन्यथा कितनी भी लागत से मकान बना हो उसकी ऊर्जा यदि डिस्टर्ब होगी तो व्यक्ति खुश और शांति से अपना जीवन व्यतीत नहीं कर पाएगा

 अब बात करते हैं वास्तुशास्त्र के महत्व की

 वास्तु शास्त्र का आधार पंचतत्व है, किंतु पृथ्वी पर  बनने वाले चुंबकीय शक्ति के आधार पर यह कार्य करता है और सारे विश्व में यह चुंबकीय शक्ति व्याप्त है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पंचतत्व के द्वारा उस पृथ्वी के चुंबकीय शक्ति से भी हमें जोड़े रखता है वास्तव में इसका महत्व इसलिए और भी बढ़ जाता है क्योंकि यह पूरी तरह से वैज्ञानिक शास्त्र भी है क्योंकि इसकी सभी बातें किसी न किसी रूप में हमें विज्ञान से जोड़ती हैं। जो चीजें हमारे ऋषि-मुनियों ने पहले से खोज रखी है अपने ज्ञान और अपने ध्यान के बदौलत उसमें से कुछ चीजों को विज्ञान ने साबित किया है और कुछ चीजों के बारे में विज्ञान अभी भी शोध कर रहा है।
 इस तरह से देखा जाए तो मनुष्य के जीवन में वास्तु का महत्व अहम स्थान रखता है इसके अनुरूप भवन निर्माण से उस में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है, फल स्वरुप उसमें रहने वाले लोगों का जीवन सुखमय होता है, वहीं परिवार के सदस्यों को उनके हर कार्य में सफलता भी मिलती है।
 आइए आज हम एक उदाहरण पर चर्चा करते हैं जो हमें साफ संकेत देता है कि जो वास्तु सम्मत घर में रहता है और जो वास्तु सम्मत घर में नहीं रहता है  उन दोनों के जीवन में अंतर साफ दिखाई देता है जैसे
 एक व्यक्ति जो वास्तु के अनुसार रहता है
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उसकी किस्मत उसका लक उसके साथ रहता है, 
उसका व्यापार फलता फूलता रहता है और नौकरी में तरक्की मिलती रहती है और सरकारी समस्याओं से दूर रहता है, पारिवारिक सुख-शांति बनी रहती है, वंश वृद्धि होती  है, इसका कारण सिर्फ इतना सा है कि जो वास्तु सम्मत भवन या प्रतिष्ठान में नहीं रहता है
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उसे इन तकलीफों का सामना बार-बार करना पड़ता है इसलिए दोस्तों वास्तु के महत्व को समझइए और अपने मकान को वास्तु सम्मत बनाइए अगर यह जानकारी आपको अच्छी लगी हो तो कृपया इसे शेयर जरूर करें लाइक करें कमेंट करें, धन्यवाद
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Sarvesh Astrologer Vastushastri

Astro Vastu Sarvesh (AVS) का उद्देश्य लगो की जनम कुंडली से निकलने वाली ऊर्जा और उस व्यक्ति के मकान से निकलने वाली ऊर्जा के बीच तालमेल बैठाना ही है, ताकि वो व्यक्ति मकान के बजाय "सुख और समृद्ध घर" मे रहे। इंसान के सोच से कर्म का निर्माण होता है, और कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है, AVS आपके कर्म को जागृत करते है और आप अपने भाग्य को।

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2 comments:

  1. Thanks for taking the time to discuss this, I feel strongly about it and love learning more on this topic Discover More Here.

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    1. अपना कीमती समय मेरे पेज पर देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद, आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए मैं, पूर्ण रूप से प्रयास करूंगा। और नई नई जानकारी ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी आपके लिए लाने का प्रयत्न करूंगा।

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