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Astronomy-zodiac


Astronomy-zodiac


नमस्कार दोस्तों स्वागत है आप सबका हमारे Astronomy या Zodiac के इस पेज में, चलिए शुरू करते हैं आज जिन प्रश्नों का answer इस पेज में मिलेंगे वह हैं;  Astronomy या Zodiac क्या हैं। आखिर ग्रह होते क्या है और कैसे कार्य करते हैं


हमारा ब्रह्मांड, zodiac  या Astronomy जिसे हम खगोल विज्ञान के नाम से भी जानते हैं

 यदि हम ग्रहों के बारे में समझना चाहे तो इसे समझने के लिए हमें Astronomy-zodiac  खगोल विज्ञान  को समझना बहुत जरूरी है।
Astronomy-zodiac, खगोल विज्ञान
Astronomy-zodiac
जैसा कि हम सभी जानते हैं की ब्रह्मांड
की संरचना पूर्व में एक महा विस्फोट (big-bang theory) के कारण हुई है। अरबों वर्ष पूर्व ब्रह्मांड में एक महा विस्फोट हुआ जिसकी वजह से ब्रह्मांड में कई प्रकार की गैस उत्पन्न हुई, जिसमें हीलियम, हाइड्रोजन मुख्य है। फिर कुछ समय के पश्चात जब ब्रह्मांड स्थिर अवस्था में आने लगा तब उसमें तारे और ग्रहों का प्रारूप  बनने लगा जिसमें प्रमुख रुप से सूर्य का अस्तित्व सबसे प्रभावशाली था, और ऊर्जा का एकमात्र स्रोत भी यही सूर्य बने और बाकी ग्रह सूर्य के प्रभाव में आकर उसकी परिक्रमा करने लगे और सूर्य से  ऊर्जा प्राप्त करने लगे।  सभी ग्रहों को Zodiac में अपने आकार दूरी और एक निश्चित पथ प्राप्त हुआ।  ज्योतिष में Astronomy-zodiac 16 x 360 डिग्री में नापा जाता है और 30-30 डिग्री की 12  भाव बनाते हैं, जिन्हें 12 राशियां संचालित करती हैं, जो नौ ग्रहों से प्रभावित होती हैं, ग्रह किसी न किसी नक्षत्र में बैठते हैं इसलिए 27 नक्षत्र अपनी अहम भूमिका निभाते हैं।

नवग्रह 

इनमें सूर्य के सबसे नजदीक बुध ग्रह है फिर शुक्र का फिर पृथ्वी, फिर मंगल, बृहस्पति और सब से दूर शनि आते हैं इनमें पृथ्वी की दूरी सूर्य से इतनी थी कि ना तो वह सूर्य के बहुत ज्यादा नजदीक थे ना ही बहुत ज्यादा दूर इसलिए पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति हुई और जल की अधिक मात्रा होने की वजह से इसमें हर प्रकार के जीव जंतु एवं वनस्पति का उत्पत्ति हुई।
 पृथ्वी से ही चंद्रमा की उत्पत्ति हुई और इन दोनों से राहु और केतु बने यह नवग्रह  ही है जो ज्योतिष में सबसे अधिक प्रभाव देते हैं या यूं कहें कि इनके प्रभाव से ही हमारी जन्म कुंडली का निर्माण होता है बालक के  जीवन का जन्म से लेकर मृत्यु तक का विवरण जन्म कुंडली देती है। जिसके अनुसार ज्योतिषी बालक के संपूर्ण जीवन का हाल बता देते हैं और उसका स्वभाव भी बता देते हैं

आखिर ग्रह होते क्या है और कैसे कार्य करते हैं ग्रहों के प्रभाव

ग्रहों को और अच्छे से समझने के लिए थोड़ा और गहराई में जाना पड़ेगा वास्तव में ग्रह एक पिंड के रूप में है जो गतिमान अवस्था में  समस्त ब्रह्मांड  में भ्रमण करते हैं और सूर्य के चक्कर लगाते है उन्हें जीवित ग्रह कहते हैं जो पिंड गतिमान अवस्था में नहीं है जिसकी कोई अपनी धुरी नहीं है अपनी चाल नहीं है उसे ग्रहों के रूप में  स्वीकृति नहीं मिली सभी ग्रह जो जीवित है पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव जंतु मनुष्यों पर अपना प्रभाव डालते हैं सभी ग्रह गुरुत्वाकर्षण के द्वारा ब्रह्मांड में या खगोल में एक दूसरे से निश्चित दूरी बनाते हुए भ्रमण करते हैं और सभी ग्रह सूर्य की ही परिक्रमा कर रहे हैं यह सिद्धांत आकर्षण और प्रतिकर्षण पर आधारित है जिसे विज्ञान में बचपन में हमें पढ़ाया जाता है सभी ग्रहों में चंद्रमा जो पृथ्वी के चक्कर लगाते हैं उनकी गति सबसे तेज होती है और बात करें यदि शनि की तो शनि ग्रह की गति सबसे धीमी गति होती है इसलिए शनि का प्रभाव भी एक राशि पर सबसे अधिक होता है

Astronomy-zodiac, खगोल विज्ञान
Astronomy-zodiac


दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आज आपको Astronomy-zodiac की थोड़ी सी अहमियत बता पाने में मैं कामयाब रहा हूं, यदि आपके कोई सुझाव हो तो हमें अवश्य बताएं, और हां यदि आपके सुझाव हमें प्राप्त होंगे तो हमें अत्यधिक प्रसन्नता होगी इसलिए Contact पर जाकर हमें मैसेज जरूर करें, उससे  हमारा प्रोत्साहन बढ़ेगा और हम Jyotish या इससे जुड़े हुए पहलुओं के विषय में और वास्तु के विषय में और भी अधिक से अधिक जानकारी आपके साथ शेयर करेंगे जो हमें हमारे गुरुओं से प्राप्त हुई है       धन्यवाद

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Sarvesh Astrologer Vastushastri

Astro Vastu Sarvesh (AVS) का उद्देश्य लगो की जनम कुंडली से निकलने वाली ऊर्जा और उस व्यक्ति के मकान से निकलने वाली ऊर्जा के बीच तालमेल बैठाना ही है, ताकि वो व्यक्ति मकान के बजाय "सुख और समृद्ध घर" मे रहे। इंसान के सोच से कर्म का निर्माण होता है, और कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है, AVS आपके कर्म को जागृत करते है और आप अपने भाग्य को।

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