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क्या उपाय से कोई हानि भी होती है?


जी नहीं आप किसी भी प्रकार के उपाय upay निश्चिंत होकर के कर सकते हैं, इनके करने का आधार सिर्फ धार्मिक श्रद्धा तथा विश्वास और लक्ष्य को केंद्रित करना ही होता है।  उपाय दो प्रकार से किए जाते हैं-
प्रथम जो नियमित रूप से किए जाएं जिनमें लंबे समय के लिए चूक हो जाए तभि फल में अंतर आता है  जैसे गाय अथवा कुत्ते को रोटी देना, गुरुवार को केले के वृक्ष को जल देना, शनिवार को पीपल में जल देना और दीपक अर्पित करना यह नियमित श्रेणी के उपाय हैं। इनमें यदि एक-दो दिन का अंतर भी आ जाए तो इनका असर नगण्य नहीं होता।

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 दूसरा उपाय जो निर्धारित संख्या में निश्चित दिन के लिए किए जाते हैं, जैसे शनि प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए 21 शनिवार को पीपल में जल के साथ दीपक जलाना तथा काले तिल व उड़द का दान करना यह समयबद्ध श्रेणी  के उपाय हैं यदि इनमें कोई खोट होता है तो पुन: एक से प्रारंभ  करके फिर 21 दिन  तक करना होगा

 कितनी संख्या में उपाय upay करने चाहिए?


 मित्रों आप अपने दिमाग से उपायों की संख्या को निकाल दें क्योंकि इसकी कोई निश्चित संख्या निश्चित नियमावली नहीं होती है समस्या के  वेग और  और परिस्थितियों पर इसकी संख्या आधारित होती है एक ज्योतिषी कुंडली के आधार पर इसका निर्णय करता है ।

 कौन-कौन उपाय कर सकता है?


upay करने के लिए कोई उम्र विशेष का वर्णन शास्त्रों में नहीं मिलता है। वैसे भी इनका आधार श्रद्धा धर्म और विश्वास पर आधारित होता है। जिस प्रकार हम ईश्वर की आराधना करते हैं उसमें बच्चे  बूढ़े और जवान स्त्री पुरुष सभी तरह के लोग ईश्वर की आराधना करते हैं इसलिए जिसको भी समस्या हो वही  उपाय कर सकता है। बच्चे शिक्षा के लिए युवा विवाह एवं व्यापार- नौकरी के लिए, तरक्की के लिए वृद्ध बीमारी के लिए या अपने परिवार की समृद्धि के लिए कभी भी उपाय कर सकते हैं।

उपाय कब आरंभ करें?


 हमारी सृष्टि पृथ्वी पर्यावरण सभी कुछ पॉजिटिव और नेगेटिव दो एनर्जी पर आधारित है इसी प्रकार से हमारे 27 नक्षत्र के देवता सुर और असुर दोनों ही बनते हैं और हमारा ज्योतिष इन्हीं नक्षत्रों पर आधारित है और वास्तु इन्हीं पॉजिटिव और नेगेटिव एनर्जी पर आधारित है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन मिलता है की उपाय किसी भी शुक्ल पक्ष अथवा उस उपाय के प्रतिनिधि दिन से आरंभ कर सकते हैं। अर्थात यदि देव ग्रह से समस्या हो तो शुक्ल पक्ष से और यदि असुर पक्ष से समस्या हो तो कृष्ण पक्ष से उपाय आरंभ करें। उदाहरण के लिए यदि आपको धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी जी से संबंधित उपाय करना है तो आप किसी भी शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से आरंभ कर सकते हैं अथवा कोई ऐसा उपाय करना जो शनिदेव से संबंधित है, तो किसी भी कृष्ण पक्ष के शनिवार से upay आरंभ कर सकते हैं इसके अलावा यदि आप अति शीघ्र अधिक लाभ प्राप्त करना चाहते हैं तो अपनी राशि के अनुसार शुभ दिन तथा शुभ समय के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उस दिन से आप अपना उपाय आरंभ कर सकते हैं। इसके साथ ही रिक्ता तिथि, घर में सूतक अथवा सोवर ना हो अर्थात किसी की मृत्यु अथवा बच्चे का जन्म के 12 दिन के अंदर यह प्रयोग या उपाय नहीं करना चाहिए। यदि आचार्य वराहमिहिर के बताए अनुसार समय पर कोई उपाय upay आरंभ किया जाए तो उसे निष्फल होने की संभावना ना के बराबर होती है।

मित्रों उपायों के बारे में संक्षेप में मैंने बताने की आपको कोशिश की है उम्मीद करता हूं की यह कोशिश मेरी कामयाब होगी और आपको पसंद भी आएगी यदि उपायों से जुड़े आपकी किसी भी प्रकार की कोई और समस्या हो तो आप फोन के माध्यम से या ईमेल के माध्यम से हमसे संपर्क कर सकते हैं और निश्चित ही हम आपकी समस्या को दूर करने का प्रयास करेंगे उम्मीद करता हूं कि मेरी  दी हुई जानकारी से आप पूर्ण रूप से संतुष्ट हैं। यदि आप अपने नजदीक में या अपने जानने वालों को ऐसी जानकारी से अवगत कराना चाहते हैं तो इस पोस्ट को शेयर करिए, लाइक करिए, कमेंट करिए       Contact                                        

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                                                          धन्यवाद  
                                                  दोस्तों मैं आपका  दोस्त
                                                  एस्ट्रोलॉजर वास्तु शास्त्री
                                                             सर्वेश


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Sarvesh Astrologer Vastushastri

Astro Vastu Sarvesh (AVS) का उद्देश्य लगो की जनम कुंडली से निकलने वाली ऊर्जा और उस व्यक्ति के मकान से निकलने वाली ऊर्जा के बीच तालमेल बैठाना ही है, ताकि वो व्यक्ति मकान के बजाय "सुख और समृद्ध घर" मे रहे। इंसान के सोच से कर्म का निर्माण होता है, और कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है, AVS आपके कर्म को जागृत करते है और आप अपने भाग्य को।

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